कई साधक बिना विधिपूर्वक पूजन के ही साधना आरंभ कर देते हैं, जिससे सफलता नहीं मिलती। यह विधि सभी प्रकार की साधनाओं के पहले करने योग्य है, विशेषकर जब आप देव, देवी, या अन्य लोक शक्तियों की साधना कर रहे हों।
पूजन की क्रमवार विधि:
1. शुद्धि और आसन ग्रहण:
स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
आसन पर बैठने से पहले यह मंत्र बोलें:
“मन मार मैदान करू करू मे चकना चूर
पॉच महेश्वर आज्ञा करो तो बैठू आसन पूर”
2. पवित्रीकरण (शुद्धिकरण):
बाएं हाथ में जल लें, उसमें पाँचों उंगलियाँ डालकर यह मंत्र पढ़ें:
“ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा।
यः स्मरेत पुण्डरीकाक्षं सः बाह्याभ्यंतरः शुचिः॥
ॐ पुनातु पुण्डरीकाक्षाय नमः”
3. आचमन करें:
तीन बार यह मंत्र बोलें और आचमन करें:
ॐ केशवाय नमः
ॐ माधवाय नमः
ॐ नारायणाय नमः
दाएँ अंगूठे से होठ पोंछकर हाथ धो लें।
4. अनुलोम-विलोम प्राणायाम (3 बार)
- दाहिने हाथ का अंगूठा दाहिनी नासिका पर रखें और बंद करें।
- बाईं नासिका से श्वास अंदर लें (5 सेकंड)
- अब बाईं नासिका को बंद करें, और
- दाहिनी नासिका से श्वास बाहर छोड़ें (5 सेकंड)
5. दीप प्रज्वलन मंत्र: (दीप जलाएँ)
“ॐ ज्योत्ज्योत् महा ज्योत् सकल ज्योत् जगाये
तुमको पूजे सकल संसार ज्योत माता तू ईश्वरी
तू हमारी धरम की माता हम तेरे धरम के पूत
ॐ ज्योति पुरुषाय धीमहि तन्नो ज्योतिरनंजन प्रचोदयात्”
5. फिर अगरबत्ती दिखाएँ
6. गुरूजी का पूजन करें : (गुरु नहीं हे तो शिवजी को गुरु मानकर पूजा करे)
गुरू का आवाहन करें
- दायें हाथ में चावल और जल लें और यह मंत्र बोलें (उदाहरण):
“अहं त्वां श्री भगवान शिव आवाहनं करिष्ये इहागच्छ तिष्ठ इदं आसनं समर्पयामि”
इसी तरीके से अन्य शक्ति का आह्वाहन किया जाता हे जेसे स्थान देवता को बुलाना है तो
“अहं त्वां श्री स्थान देवता आवाहनं करिष्ये इहागच्छ तिष्ठ इदं आसनं समर्पयामि”
मंत्र नही याद रहे तो मन में भाव करते हुए अपनी भाषा में आसन पर बैठने को कहे
हे गुरुदेव, या हे शिवजी य हे गैसहजी में आपको बैठने के लिए आसन दे रहा हु| कृपया आसन ग्रहण करे |
- हाथ से बैठने का इशारा करें। फिर पूजन करे |
➤ पूजन सामग्रियों का समर्पण क्रम:
- धूप – इदं धूपं गृहाणयामि
- दीप – इदं दीपं दर्शयामि
- पुष्प – इदं पुष्पं समर्पयामि
- चंदन – इदं चंदनं समर्पयामि
- सुगंध – इदं सुगंधिं समर्पयामि
- नैवेद्य – इदं नैवेद्यं निवेदयामि
- जल – इदं जलं समर्पयामि
बाद में इसी तरीके से गणेशजी, इष्टदेव, कुलदेव/कुलदेवी, पितृदेव और स्थान देव का पूजन करे
7. गणेश पूजन करें
9. इष्ट देव का पूजन करें
10. कुलदेवता/कुलदेवी का पूजन करें
11. स्थान देवता का पूजन करें
12. पितृ देवताओं का पूजन करें
13. सभी से साधना में सफलता का आशीर्वाद लें
14. मंत्र जप आरंभ करें (बीच में न छोड़ें)
15. आसन छोड़कर भागे नहीं
16. अनुभूतियाँ केवल गुरू से साझा करें, किसी और से नहीं।
रक्षा घेरा (यदि उग्र/तामसिक साधना हो):
- रक्षा मंत्रो द्वारा चारों ओर रक्षा-चक्र बनाएँ।
- चाकू, लोहा या कील से सीमा खींच सकते हैं।
🙏 गुरु वंदना:
गुरु ब्रह्मा गुरु विष्णु गुरु देवो महेश्वरः।
गुरु साक्षात् परं ब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः॥
🙏 गणेश वंदना:
वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभः।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
ये पूजन आपको रोज करना हे कम से कम एक बार
सब पूजा ख़त्म होने के बाद क्षमा याचना करें
“आवाहनं न जानामि, न जानामि विसर्जनम्।
पूजनं न जानामि, क्षमस्व परमेश्वर॥”
“मंत्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं जनार्दन।
यत्पूजितं मया देव, परिपूर्ण तदस्तु मे॥”
और देवी देवता से अनुमाई ले कि मैं अब उठ रहा हूं और विदाई ले
निज मन्दिर गच्छ गच्छ परमेश्वर
निज मन्दिरम् गच्छ गच्छ परमेश्वरी
फिर आप अपने हिसाब से भजन कर सकते हे, स्तुति कर सकते हे, कोई स्तोत्र या पाठ कर सकते हे, मंत्र जाप कर सकते हे; इस तरीके से पूजन दी पर आपको 100% परिणाम देखने को मलेगा. यदि कोई अनुभव हो रहा है हमसे व्हात्सप्प कांटेक्ट करे वेबसाइट से
